“जब जनता जागरूक होती है, तब शासन जवाबदेह होता है; और जब सूचना जनता के हाथ में होती है, तब लोकतंत्र वास्तव में जीवंत होता है।”

सूचना का अधिकार: लोकतंत्र की प्राणवायु और न्यायपूर्ण भारत की आधारशिला

प्रिय पाठकों,

Justice Ambit की आधिकारिक वेबसाइट के शुभारंभ के इस ऐतिहासिक अवसर पर आप सभी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन। यह केवल एक समाचार पोर्टल का प्रारंभ नहीं है, बल्कि सत्य, न्याय, पारदर्शिता, संवैधानिक मूल्यों और जन-जागरूकता के राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ है।

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लोकतंत्र की सफलता केवल चुनावों से नहीं, बल्कि एक जागरूक नागरिक और जवाबदेह शासन से सुनिश्चित होती है। यदि जनता को यह जानने का अधिकार न हो कि उसके नाम पर सरकार क्या निर्णय ले रही है, सार्वजनिक धन कहाँ व्यय हो रहा है और योजनाओं का लाभ किसे मिल रहा है, तो लोकतंत्र का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 अस्तित्व में आया। यह कानून केवल सूचना प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी स्थापित करने का सशक्त उपकरण है। यह अधिनियम प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार देता है कि वह सार्वजनिक प्राधिकरणों से सूचना प्राप्त करे और प्रशासन को उत्तरदायी बनाए।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को न्यायपालिका ने समय-समय पर इस सिद्धांत से जोड़ा है कि जानने का अधिकार (Right to Know) लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है। इसी संवैधानिक भावना को प्रभावी रूप देने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम लागू किया गया, जिसने शासन और जनता के बीच पारदर्शिता का नया अध्याय खोला।

पिछले दो दशकों में RTI ने देशभर में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मनरेगा, पंचायत, नगर निकाय, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस प्रशासन और अन्य अनेक क्षेत्रों में सूचना के अधिकार के माध्यम से अनियमितताओं का खुलासा हुआ तथा प्रशासनिक जवाबदेही को बल मिला। यह सिद्ध हुआ कि जब नागरिक प्रश्न पूछते हैं, तब व्यवस्था अधिक उत्तरदायी बनती है।

फिर भी यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि RTI का उपयोग जिम्मेदारी, सद्भावना और जनहित की भावना से किया जाए। सूचना का अधिकार किसी व्यक्ति या संस्था को अनावश्यक रूप से परेशान करने का माध्यम नहीं, बल्कि सुशासन को सुदृढ़ करने का लोकतांत्रिक साधन है। इसका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना है।

Justice Ambit का संकल्प है कि यह मंच निष्पक्ष, तथ्यपरक और उत्तरदायी पत्रकारिता को समर्पित रहेगा। हम केवल समाचार नहीं देंगे, बल्कि कानून, संविधान, सूचना का अधिकार, मानवाधिकार, उपभोक्ता अधिकार, न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णय, जनहित के मुद्दों और नागरिक अधिकारों पर विश्वसनीय एवं उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराएँगे। हमारा विश्वास है कि जागरूक नागरिक ही सशक्त लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं।

हम पत्रकारिता को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति उत्तरदायित्व मानते हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज़ भी उसी गंभीरता से उठाई जाए, जिस गंभीरता से किसी बड़े राष्ट्रीय मुद्दे को उठाया जाता है। सत्य, निष्पक्षता और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता ही हमारी पहचान होगी।

आज, इस नई शुरुआत पर मैं देश के प्रत्येक नागरिक, पत्रकार, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी और जनप्रतिनिधि से आग्रह करता हूँ कि वे सूचना के अधिकार को केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के एक सशक्त माध्यम के रूप में अपनाएँ।

आइए, हम सब मिलकर ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें जहाँ शासन पारदर्शी हो, प्रशासन जवाबदेह हो, नागरिक जागरूक हों और न्याय प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचे।

Justice Ambit का ध्येय स्पष्ट है—

“सत्य हमारी शक्ति है, न्याय हमारा उद्देश्य है, संविधान हमारा मार्गदर्शक है और जनहित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

सत्यमेव जयते।
जय हिन्द।

महावीर प्रसाद पारीक
  (प्रधान सम्पादक) Justice Ambit

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