स्कूल में 10वीं-12वीं की पढ़ाई महज तृतीय श्रेणी शिक्षकों के भरोसे! शहीद शोहन लाल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

सरकार की बड़ी-बड़ी योजनाएं, लेकिन खींवज के स्कूल में 10वीं-12वीं की पढ़ाई महज तृतीय श्रेणी शिक्षकों के भरोसे!
शहीद शोहन लाल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल


खींवज (लाडनूं )सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आए दिन नई-नई योजनाओं और घोषणाओं का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन धरातल पर तस्वीर कुछ और ही नजर आ रही है। शहीद शोहन लाल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, खींवज में शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों में चिंता बनी हुई है।
बताया जा रहा है कि विद्यालय में 10वीं और 12वीं जैसे महत्वपूर्ण बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई भी पर्याप्त विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के अभाव में प्रभावित हो रही है। यदि इन कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के भरोसे है, तो यह शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
बड़ी योजनाएं कागज पर, शिक्षक कक्षा में नहीं?
सरकार सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की बात करती है। लेकिन सवाल यह है कि जब स्कूल में आवश्यक विषयों के पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे, तो इन योजनाओं का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों को कैसे मिलेगा?
बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में शिक्षकों की कमी सीधे तौर पर विद्यार्थियों की पढ़ाई, तैयारी और परिणाम को प्रभावित कर सकती है।
शिक्षा विभाग से जवाब मांग रहे अभिभावक
अभिभावकों का सवाल है कि विद्यालय में स्वीकृत शिक्षक पद कितने हैं? वर्तमान में कितने शिक्षक कार्यरत हैं? 10वीं और 12वीं के प्रत्येक विषय को पढ़ाने के लिए संबंधित विषय के शिक्षक उपलब्ध हैं या नहीं? यदि पद रिक्त हैं तो उन्हें भरने के लिए विभाग ने क्या कार्रवाई की?
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ प्रयोग नहीं होना चाहिए। सरकार और शिक्षा विभाग को कागजी योजनाओं के साथ-साथ विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए।
अब देखना होगा—विभाग कब जागेगा?
खींवज के अभिभावक और ग्रामीण शिक्षा विभाग से मांग कर रहे हैं कि विद्यालय की वास्तविक स्थिति की तत्काल जांच करवाई जाए और 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड कक्षाओं के लिए आवश्यक विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था की जाए।
बड़ा सवाल यह है कि सरकार योजनाएं तो बड़ी-बड़ी बना रही है, लेकिन खींवज के बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक कब मिलेंगे?
बच्चों का भविष्य घोषणाओं से नहीं, कक्षा में मौजूद योग्य शिक्षकों से बनता है।

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