डूंगरपुर में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धि: पोर्टल पर राज्यभर में प्रथम स्थान, गंभीर एनीमिया से पीड़ित छात्र को मिला नया जीवन

डूंगरपुर में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धि: पोर्टल पर राज्यभर में प्रथम स्थान, गंभीर एनीमिया से पीड़ित छात्र को मिला नया जीवन

 

संवाददाता – संतोष व्यास
डूंगरपुर। जिले में बच्चों के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है। मोबाइल हेल्थ टीमों की सतर्कता और त्वरित प्रयासों से जरूरतमंद बच्चों को समय पर उच्च स्तरीय और निःशुल्क उपचार मिल रहा है। इसी कड़ी में डिजिटल नवाचार और उत्कृष्ट प्रबंधन के दम पर जुलाई माह में डूंगरपुर जिला आरबीएसके 2.0 पोर्टल पर संपूर्ण राज्यभर में प्रथम स्थान पर रहा है, जो जिले की मजबूत कार्यशैली और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमाण है।
इस सफलता की एक प्रेरणादायक मिसाल हाल ही में निठाउवा क्षेत्र में देखने को मिली। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, निठाउवा गामड़ी में स्वास्थ्य जांच के दौरान 15 वर्षीय छात्र प्रकाश चंद मीणा अत्यधिक थकान, कमजोरी और चलने में असमर्थता से जूझता नजर आया। आरबीएसके की मोबाइल टीम के डॉक्टर महेंद्र शर्मा और फार्मासिस्ट मयंक पंड्या ने जब उसकी जांच की, तो उसका हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 4.2 पाया गया। गंभीर एनीमिया से पीड़ित छात्र के पैरों में सूजन थी और वह बमुश्किल स्कूल आ पा रहा था। एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रकाश के पिता के सामने आर्थिक तंगी और रक्त की व्यवस्था करने की बड़ी चुनौती थी।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए टीम ने बिना एक पल गंवाए 108 एंबुलेंस की मदद से छात्र को तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया। साथ ही, परिजनों को आश्वस्त किया कि सरकारी योजना के तहत एंबुलेंस वाहन, रक्त और संपूर्ण उपचार पूरी तरह निःशुल्क है। टीम के सक्रिय सहयोग से जिला अस्पताल में समय पर रक्त चढ़ाया गया, जिससे अब प्रकाश के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आ रहा है और उसे नया जीवन मिला है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलंकार गुप्ता ने बताया कि विभाग का मुख्य उद्देश्य आरबीएसके कार्यक्रम के माध्यम से हर बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति को सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस से जोड़ना है। इससे एनीमिया, कुपोषण, जन्मजात विकारों या अन्य कमियों से ग्रस्त बच्चों की सटीक ट्रैकिंग कर समय पर उनका जीवन बचाया जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों में किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या दिखने पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में आरबीएसके टीम से संपर्क कर निःशुल्क इलाज जल्द से जल्द शुरू करवाएं।
जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी एवं नोडल अधिकारी आरबीएसके डॉ. लोकेश कुमार परमार ने बताया कि मैदानी स्तर से लेकर जिला अस्पतालों तक की समस्त स्क्रीनिंग और उपचार डेटा को आरबीएसके 2.0 पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किया जाता है, जिसके उत्कृष्ट परिणामों के फलस्वरूप जिला सिरमौर बना है। अतिरिक्त जिला नोडल अधिकारी डॉ. मनीषा डामोर ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि अप्रैल से जुलाई तक जिले में 77,436 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें से 3,430 गंभीर बच्चों को रेफर कर 3,284 का सफल उपचार किया गया है। कार्यक्रम के तहत जन्मजात हृदय रोग, कटे होंठ-तालू, दंत रोग और किशोरावस्था की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का निःशुल्क इलाज किया जा रहा है। डूंगरपुर में अब तक दो हृदय रोग के ऑपरेशन किए जा चुके हैं, जबकि आगामी सितंबर माह में 12 और ऑपरेशन किए जाने की योजना है। आयुष चिकित्सकों, फार्मासिस्टों और एएनएम की समर्पित टीमें इस अभियान को सफल बनाने में जुटी हुई हैं।

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