25 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला Article 131 के तहत सांविधिक प्राधिकरण ‘State’ नहीं; लखनऊ विकास प्राधिकरण की याचिका पर हाईकोर्ट को मेरिट में सुनवाई के निर्देश

  1. 25 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Article 131 के तहत सांविधिक प्राधिकरण ‘State’ नहीं; लखनऊ विकास प्राधिकरण की याचिका पर हाईकोर्ट को मेरिट में सुनवाई के निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने Lucknow Development Authority vs Union of India & Ors. मामले में संविधान के अनुच्छेद 131 को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शेल नागू की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी सांविधिक प्राधिकरण (Statutory Authority) को संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत ‘State’ नहीं माना जा सकता।

21 अगस्त 2026 को दिए गए इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Article 131 के तहत उसकी मूल अधिकारिता केवल भारत सरकार और संविधान की First Schedule में शामिल एक या अधिक राज्यों के बीच विवादों तक सीमित है। किसी विकास प्राधिकरण या अन्य सांविधिक संस्था को इस प्रावधान के तहत ‘State’ का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

Article 12 और Article 131 में अंतर स्पष्ट

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण रूप से Article 12 और Article 131 में प्रयुक्त ‘State’ शब्द के बीच अंतर को स्पष्ट किया। न्यायालय के अनुसार Article 12 के तहत ‘State’ की परिभाषा व्यापक है, जिसके दायरे में सरकारी नियंत्रण या सार्वजनिक कार्य करने वाली विभिन्न संस्थाएं और प्राधिकरण आ सकते हैं।

हालांकि Article 131 का उद्देश्य और संवैधानिक संदर्भ अलग है। इस अनुच्छेद में ‘State’ का आशय संविधान में वर्णित संवैधानिक राज्यों से है। इसलिए केवल Article 12 के तहत किसी संस्था के ‘State’ माने जाने से वह Article 131 के तहत भी ‘State’ नहीं बन जाती।

25 साल से लंबित था मामला

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि संबंधित रिट याचिका करीब 25 वर्षों से लंबित थी। हाईकोर्ट ने Article 131 से संबंधित आधार पर याचिका को खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस दृष्टिकोण को त्रुटिपूर्ण माना और मामले को वापस हाईकोर्ट भेजते हुए निर्देश दिया कि याचिका पर मामले के गुण-दोष यानी merits के आधार पर शीघ्र निर्णय किया जाए।

संवैधानिक कानून के लिए महत्वपूर्ण फैसला

यह निर्णय संवैधानिक कानून के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि Article 12 में ‘State’ की व्यापक परिभाषा को Article 131 में उसी रूप में लागू नहीं किया जा सकता।

फैसला यह भी रेखांकित करता है कि लंबे समय से लंबित मामलों का निस्तारण केवल किसी गलत संवैधानिक व्याख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जहां आवश्यक हो वहां मामले की वास्तविक merits पर सुनवाई की जानी चाहिए।

केस: Lucknow Development Authority v. Union of India & Ors.
Citation: 2026 INSC 923
पीठ: न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता एवं न्यायमूर्ति शेल नागू
निर्णय: 21 अगस्त 2026

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