नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्टाम्प ड्यूटी के निर्धारण को लेकर अहम कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किया है। न्यायालय ने कहा कि किसी संपत्ति पर स्टाम्प ड्यूटी की दर तय करने के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि संपत्ति किस क्षेत्र में स्थित है या मास्टर प्लान में उस क्षेत्र को किस श्रेणी में रखा गया है। संपत्ति का वास्तविक उपयोग यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होगा कि उस पर औद्योगिक या वाणिज्यिक दर से स्टाम्प ड्यूटी लगाई जाए।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने Harinder Singh Sodhi बनाम State of Rajasthan & Ors. मामले में 24 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। इस मामले का Citation 2026 INSC 922 है।
औद्योगिक उपयोग होने पर औद्योगिक दर
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी संपत्ति का वास्तविक उपयोग औद्योगिक गतिविधियों अथवा विनिर्माण कार्य के लिए किया जा रहा है, तो केवल क्षेत्रीय वर्गीकरण के आधार पर उसे वाणिज्यिक संपत्ति मानना उचित नहीं होगा।
अर्थात संपत्ति के आसपास का क्षेत्र किस श्रेणी में आता है, अथवा मास्टर प्लान में उस क्षेत्र का क्या वर्गीकरण है, यह अकेला निर्णायक आधार नहीं हो सकता। स्टाम्प ड्यूटी निर्धारित करते समय संपत्ति के वास्तविक उपयोग पर भी ध्यान देना होगा।
फैक्ट्री और उद्योग विभाग का रिकॉर्ड अहम
न्यायालय ने कहा कि किसी परिसर में पंजीकृत फैक्ट्री का संचालन तथा Factories Act और District Industries Centre के तहत औद्योगिक पंजीकरण जैसे दस्तावेज संपत्ति के वास्तविक औद्योगिक उपयोग को साबित करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसलिए स्टाम्प ड्यूटी अधिकारी को संपत्ति का वर्गीकरण करते समय उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड और वास्तविक गतिविधियों की भी जांच करनी होगी।
उत्पादन के साथ बिक्री होने से नहीं बदलेगी संपत्ति की प्रकृति
फैसले में एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आई कि यदि किसी औद्योगिक परिसर में निर्मित उत्पादों की बिक्री की जाती है, तो सिर्फ बिक्री होने के कारण पूरी संपत्ति को वाणिज्यिक संपत्ति नहीं माना जा सकता।
यदि परिसर में मुख्य गतिविधि निर्माण या उत्पादन की है और उसी परिसर से निर्मित सामान की बिक्री भी होती है, तो यह तथ्य अपने आप में संपत्ति को औद्योगिक से वाणिज्यिक श्रेणी में परिवर्तित नहीं करता।
स्टाम्प ड्यूटी अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण दिशा
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से स्टाम्प ड्यूटी अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन सामने आया है। संपत्ति की स्टाम्प ड्यूटी तय करते समय केवल मास्टर प्लान, क्षेत्रीय वर्गीकरण या स्थान को आधार बनाने के बजाय वास्तविक उपयोग और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड पर भी विचार करना होगा।
राजस्थान में संपत्ति मालिकों को राहत
राजस्थान में औद्योगिक इकाइयों और ऐसी संपत्तियों के मालिकों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां औद्योगिक एवं वाणिज्यिक स्टाम्प ड्यूटी दर को लेकर विवाद उत्पन्न होते हैं।
फैसले का व्यापक सिद्धांत है कि संपत्ति की स्टाम्प ड्यूटी का वर्गीकरण उसके वास्तविक उपयोग से जुड़ा होना चाहिए, न कि केवल उस क्षेत्र की कागजी श्रेणी से।
केस: Harinder Singh Sodhi v. State of Rajasthan & Ors.
Citation: 2026 INSC 922
निर्णय: 24 अगस्त 2026
पीठ: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन
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