खींवज स्कूल में विद्यार्थियों का हल्लाबोल, ग्रामीणों ने भी संभाला मोर्चा शिक्षकों के ट्रांसफर और रिक्त पदों को लेकर धरना, 5 दिन में समाधान नहीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी चार साल पहले उच्च माध्यमिक बना विद्यालय, फिर भी प्रधानाचार्य सहित कई पद खाली — शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

खींवज स्कूल में विद्यार्थियों का हल्लाबोल, ग्रामीणों ने भी संभाला मोर्चा

शिक्षकों के ट्रांसफर और रिक्त पदों को लेकर धरना, 5 दिन में समाधान नहीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

चार साल पहले उच्च माध्यमिक बना विद्यालय, फिर भी प्रधानाचार्य सहित कई पद खाली — शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

लाडनूं/खींवज। शहीद सोहनलाल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खींवज में सोमवार को विद्यार्थियों ने शिक्षकों के ट्रांसफर और लंबे समय से खाली पड़े पदों के विरोध में धरना देकर शिक्षा विभाग के प्रति अपना आक्रोश जताया। विद्यार्थियों के आंदोलन की जानकारी मिलते ही ग्रामीण भी विद्यालय परिसर में पहुंच गए और बच्चों की मांगों का समर्थन करते हुए शिक्षा विभाग एवं प्रशासन के अधिकारियों से वार्ता की।

मामला बढ़ता देख इंद्रपुरा स्कूल के राकेश मीणा तथा तापड़िया ट्रस्ट के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों और ग्रामीणों से समझाइश कर धरना समाप्त करवाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

इसके बाद उच्च अधिकारियों से बातचीत की गई। अधिकारियों की ओर से विद्यालय की समस्याओं के समाधान और रिक्त पदों को भरने के संबंध में आश्वासन दिया गया। आश्वासन के बाद विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने फिलहाल धरना समाप्त कर दिया।

प्रधा नाचार्य का पद 12 माह से खाली

ग्रामीणों के अनुसार खींवज का विद्यालय करीब चार वर्ष पूर्व उच्च माध्यमिक स्तर पर क्रमोन्नत हुआ था, लेकिन इसके बावजूद विद्यालय में प्रधानाचार्य सहित प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं।

बताया गया कि प्रधानाचार्य का पद पिछले करीब 12 महीने से खाली है और इसका अतिरिक्त चार्ज तृतीय श्रेणी के शिक्षक के पास है। वर्तमान में विद्यालय में तापड़िया ट्रस्ट के तीन तथा तृतीय श्रेणी के पांच शिक्षक कार्यरत हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि 12वीं कक्षा तक संचालित विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में शिक्षकों की कमी के बीच कार्यरत शिक्षकों के ट्रांसफर से स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।

मानाराम और सुरेंद्र के ट्रांसफर से नाराज विद्यार्थी

विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों के अनुसार आंदोलन का प्रमुख कारण स्वयंसेवक शिक्षक मानाराम मेघवाल और सुरेंद्र कुमार मेघवाल के ट्रांसफर का विरोध है।

ग्रामीणों का कहना है कि दोनों शिक्षकों ने विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काफी मेहनत की है। विद्यार्थियों के साथ उनका अच्छा जुड़ाव है। ऐसे समय में उनका ट्रांसफर किए जाने से विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दोनों शिक्षकों के ट्रांसफर आदेशों पर पुनर्विचार कर उन्हें वापस विद्यालय में लगाया जाए तथा विद्यालय में रिक्त सभी पदों को शीघ्र भरा जाए।

‘5 दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन होगा उग्र’

धरना समाप्त करते समय विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों की ओर से दिए गए आश्वासन को पांच दिनों के भीतर पूरा किया जाए। यदि पांच दिन में शिक्षकों की कमी, रिक्त पदों और ट्रांसफर किए गए शिक्षकों की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।

ग्रामीणों ने कहा कि यह मामला केवल शिक्षकों की नियुक्ति या ट्रांसफर का नहीं, बल्कि क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी शिक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आगामी आंदोलन के लिए विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार होंगे।

अब आश्वासन की परीक्षा

फिलहाल अधिकारियों के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हो गया है, लेकिन विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने पांच दिन की समय-सीमा तय कर प्रशासन के सामने चुनौती रख दी है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस अवधि में विद्यालय की समस्याओं का कितना समाधान कर पाता है और क्या विद्यार्थियों को उनका हक मिल पाता है।

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