डीडवाना में मनरेगा का बड़ा खुलासा: 20 मई 2021 को मृत महिला ने 15 जनवरी 2023 तक किया काम!
दो मस्टर रोल, एक ही MB, मोबाइल से दर्ज हाजिरी और सरकारी भुगतान के रिकॉर्ड ने खड़े किए गंभीर सवाल
प्रथम दृष्टया सरकारी अभिलेखों में कूटरचना, फर्जी प्रविष्टि एवं सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आशंका; निष्पक्ष जांच की मांग तेज
डीडवाना। डीडवाना पंचायत समिति की ग्राम पंचायत कोलिया में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। उपलब्ध सरकारी अभिलेखों के अनुसार मनोज पत्नी भरत कुमार, निवासी कोलिया, जिनका 20 मई 2021 को जयपुर स्थित एसएमएस अस्पताल में निधन हो चुका था, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में 15 जनवरी 2023 तक जीवित दर्शाकर मनरेगा कार्य करने और भुगतान दर्ज किए जाने का दावा किया गया है।
यदि उपलब्ध दस्तावेज जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों में कूटरचना (Forgery), फर्जी उपस्थिति, सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग और सार्वजनिक विश्वास के उल्लंघन का गंभीर प्रकरण बन सकता है।
दो मस्टर रोल में दर्ज है मृत महिला का नाम
दस्तावेजों के अनुसार जॉब कार्ड संख्या RJ271400203301772501/7303589 पर “अपना खेत अपना काम” योजना के तहत भंवरलाल/मांगीलाल के खेत में निजी टांका, केटल शेड एवं मेड़बंदी निर्माण कार्य दर्शाया गया है।
रिकॉर्ड में—
- मस्टर रोल संख्या 29033में 16 दिसंबर 2022 से 31 दिसंबर 2022 तक कार्य दर्ज है। संबंधित एम.बी. संख्या 1695 के पृष्ठ संख्या 86 पर इसका उल्लेख है।
- मस्टर रोल संख्या 31759में 1 जनवरी 2023 से 15 जनवरी 2023 तक कार्य दर्ज है। इसका विवरण एम.बी. संख्या 1695 के पृष्ठ संख्या 90 पर अंकित है।
अर्थात, मृत्यु के लगभग 1 वर्ष 8 माह बाद तक सरकारी रिकॉर्ड में महिला को कार्यरत श्रमिक के रूप में दर्शाया गया।
मोबाइल से दर्ज हुई हाजिरी ने बढ़ाई मामले की गंभीरता
दोनों मस्टर रोल में स्पष्ट रूप से “Rows Highlighted by Yellow Colour Indicates Attendance Has Been Taken From Mobile Device” अंकित है। इससे प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि संबंधित उपस्थिति मोबाइल आधारित डिजिटल उपस्थिति प्रणाली से दर्ज की गई।
ऐसे में कई गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं—
- मृत महिला की मोबाइल आधारित उपस्थिति किसने दर्ज की?
- किस यूज़र आईडी और मोबाइल डिवाइस से उपस्थिति अपलोड हुई?
- जियो-लोकेशन एवं टाइम-स्टैम्प किस स्थान के हैं?
- सत्यापन के बाद भुगतान किस अधिकारी ने स्वीकृत किया?
सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों की कसौटी पर मामला
सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक निर्णयों में कहा है कि सरकारी धन जनता की अमानत (Public Trust) है तथा उसके दुरुपयोग पर जवाबदेही तय होना अनिवार्य है। न्यायालय ने यह सिद्धांत भी स्थापित किया है कि “Fraud vitiates all solemn acts”, अर्थात धोखाधड़ी किसी भी प्रशासनिक या वैधानिक कार्यवाही की वैधता को समाप्त कर देती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में रिकॉर्ड की सत्यता प्रमाणित होती है, तो यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत कूटरचना, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र तथा सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े प्रावधानों के साथ-साथ मनरेगा अधिनियम और वित्तीय नियमों के उल्लंघन का विषय बन सकता है।
उच्च स्तरीय जांच की उठी मांग
मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय लोगों ने जिला कलेक्टर, जिला कार्यक्रम समन्वयक (मनरेगा), राज्य स्तर की जांच एजेंसी तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। मांग की गई है कि डिजिटल उपस्थिति का पूरा लॉग, मोबाइल डिवाइस का विवरण, जियो-टैग, भुगतान स्वीकृति श्रृंखला और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
संबंधित पक्ष का पक्ष
समाचार उपलब्ध दस्तावेजों एवं लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
(संपादकीय टिप्पणी: समाचार में वर्णित तथ्य उपलब्ध अभिलेखों और दावों पर आधारित हैं। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसी की जांच एवं विधिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगा।)

