एक संत-पुत्र ऐसा भी… जिसने मां की अंतिम अवस्था में रामधुन का मार्ग चुना

श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर संत कुशालगिरी जी महाराज

 

नागौर। मां और पुत्र का रिश्ता दुनिया के सबसे पवित्र रिश्तों में माना जाता है। लेकिन जब मां जीवन की अंतिम अवस्था में हो, तब एक संत-पुत्र द्वारा अपनी मां के लिए राम नाम और रामधुन का ऐसा वातावरण तैयार करना, श्रद्धा और आध्यात्मिक भावनाओं का अनूठा उदाहरण बन गया।

श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर संत कुशालगिरी जी महाराज, संस्थापक — कामधेनु सेना एवं विश्व स्तरीय गौ चिकित्सालय, नागौर, की 84 वर्षीय माताजी गंभीर अवस्था में हैं। स्वास्थ्य अत्यंत नाजुक होने के बावजूद संत कुशालगिरीजी महाराज ने इस कठिन समय को केवल चिंता के रूप में नहीं, बल्कि ईश्वर-स्मरण और राम नाम के सहारे स्वीकार करने का संदेश दिया।

माताजी के पास परिजन एवं श्रद्धालु उपस्थित हैं और वातावरण में राम नाम की धुन एवं प्रभु स्मरण का भाव बना हुआ है। संत-पुत्र का यह भाव लोगों के लिए श्रद्धा, संस्कार और आध्यात्मिक आस्था का प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है।

मां की अंतिम अवस्था में भी चेहरे पर आस्था, जुबां पर राम नाम…

यह दृश्य बताता है कि एक संत के लिए मां की सेवा भी साधना है और अंतिम समय में प्रभु का नाम भी सबसे बड़ा सहारा।

कामधेनु सेना एवं गौभक्त परिवार ने माताजी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ एवं शांति के लिए प्रभु श्रीराम से प्रार्थना की है।

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