वलसाड में घायल गोवंश की गौशाला पर संकट, जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू होने से बढ़ी चिंता उधार की जमीन पर 5-6 लोगों के सहयोग से चल रही गौशाला के संचालक दिनेशभाई ने बताई परेशानी, प्रशासन से स्थायी भूमि उपलब्ध कराने की मांग

वलसाड में घायल गोवंश की गौशाला पर संकट, जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू होने से बढ़ी चिंता

उधार की जमीन पर 5-6 लोगों के सहयोग से चल रही गौशाला के संचालक दिनेशभाई ने बताई परेशानी, प्रशासन से स्थायी भूमि उपलब्ध कराने की मांग

वलसाड (गुजरात)। जिले के तिथल रोड पर संचालित एक गौशाला इन दिनों संकट का सामना कर रही है। यहां घायल, बीमार और पीड़ित गोवंश की देखभाल कुछ लोगों के सहयोग से की जा रही है। गौशाला संचालक दिनेशभाई के अनुसार, पांच-छह लोगों की टीम उधार की जमीन पर इस गौशाला का संचालन कर रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक स्थायी भूमि आवंटित नहीं की गई है।

दिनेशभाई का कहना है कि जिस जमीन पर लंबे समय से गोवंश की सेवा और उपचार का कार्य किया जा रहा था, उसे खाली कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में गौशाला में आश्रय ले रहे घायल और असहाय गोवंश के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सबसे बड़ा सवाल—अब कहां जाएंगे घायल गोवंश?

गौशाला संचालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गोवंश को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की है। दिनेशभाई और उनकी टीम सीमित संसाधनों के सहारे सेवा कार्य कर रही है। उनके अनुसार, दूसरी जमीन लेने और वहां गौशाला की व्यवस्था खड़ी करने के लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता होगी, जिसे जुटाना टीम के लिए आसान नहीं है।

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि वर्तमान जमीन खाली करानी पड़ती है, तो वहां रह रहे घायल और बीमार गोवंश को कहां रखा जाएगा? उनके उपचार, चारे, पानी और नियमित देखभाल की व्यवस्था कैसे होगी?

प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील

इस मामले में प्रशासन के समक्ष यह महत्वपूर्ण प्रश्न है कि जमीन खाली कराने की प्रक्रिया के साथ-साथ गोवंश के पुनर्वास की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाएगा या नहीं। गौसेवा में जुटे लोगों की सीमित आर्थिक क्षमता को देखते हुए स्थायी भूमि उपलब्ध कराने अथवा वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था करने पर विचार किया जाना आवश्यक है।

स्थानीय प्रशासन, गोसेवी संस्थाओं, दानदाताओं और समाजसेवियों के सहयोग से इस समस्या का समाधान तलाशा जा सकता है, ताकि जमीन की समस्या के कारण घायल गोवंश की देखभाल प्रभावित न हो।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और घायल गोवंश को सुरक्षित आश्रय दिलाने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।

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